आगरा: उत्तर प्रदेश की राजनीति में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिलेश यादव की ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी पर जयंत चौधरी ने आगरा में आयोजित स्वाभिमान सभा में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में रिश्तों को गंभीरता से निभाना जरूरी है और जो व्यक्ति रिश्तों की कद्र नहीं करता, उसके साथ कौन खड़ा होगा?
12 अक्टूबर 2026 को आगरा जिले के जैंगारा गांव में आयोजित सभा में जयंत चौधरी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन पर निशाना साधने की कोशिश की गई, लेकिन वह तीर अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचा। उनके इस बयान को अखिलेश यादव की टिप्पणी के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। <Cite refs={[“turn259497news4″,”turn259497search1″,”turn259497search2”]}/>
क्या है अखिलेश यादव का ‘चवन्नी’ विवाद?
यह विवाद समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच राजनीतिक संबंधों में आई दूरी से जुड़ा है। दोनों दलों ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया था। बाद में जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गई।
अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी पर कटाक्ष करते हुए ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ जैसी टिप्पणी की थी। इस बयान को जयंत चौधरी की राजनीतिक हैसियत और पुराने गठबंधन से जुड़े संदर्भ में देखा गया।
इसके जवाब में जयंत चौधरी ने आगरा की सभा में कहा कि कुछ लोग उनकी कीमत तय करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए ब्रज की मिट्टी का महत्व कहीं अधिक है। उन्होंने ब्रज की रज के सामने खुद को भी बहुत छोटा बताया। <Cite refs={[“turn259497search1″,”turn259497search3″,”turn259497search10”]}/>
‘रिश्तों को निभाना नहीं सीखोगे तो कौन साथ खड़ा होगा?’
जयंत चौधरी ने अपने भाषण में रिश्तों की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे बोलना, हर समय व्यंग्य करना और रिश्तों को गंभीरता से नहीं लेना राजनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब राष्ट्रीय लोकदल समाजवादी पार्टी के साथ थी, तब सपा की स्थिति बेहतर थी। जयंत के इस बयान को दोनों दलों के पुराने गठबंधन और मौजूदा राजनीतिक दूरी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी से भविष्य में गठबंधन की स्थिति क्या होगी, इसका निष्कर्ष अभी निकालना जल्दबाजी होगी।
आगरा की सभा में किसानों का मुद्दा भी उठा
जयंत चौधरी ने अपने भाषण में केवल राजनीतिक विवाद पर ही बात नहीं की, बल्कि क्षेत्र के किसानों की समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने आगरा और आसपास के इलाकों में आलू की खेती तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने क्षेत्र में आलू प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने और आलू बोर्ड बनाने की आवश्यकता का मुद्दा उठाया। ऐसी व्यवस्था से आलू की खरीद, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन से जुड़े विषयों पर नीतिगत काम को बढ़ावा मिल सकता है।
जयंत चौधरी ने एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गन्ने, मक्का और धान जैसी फसलों से एथेनॉल उत्पादन किसानों के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। इस मुद्दे पर उन्होंने अखिलेश यादव की आलोचना की। यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी थी; इसके आर्थिक प्रभावों का आकलन संबंधित नीतियों और आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए। <Cite refs={[“turn259497search3″,”turn259497search6″,”turn259497search10”]}/>
पश्चिमी यूपी की राजनीति में RLD की भूमिका
राष्ट्रीय लोकदल का पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर जाट बहुल इलाकों में लंबे समय से राजनीतिक आधार रहा है। आगरा और मथुरा समेत ब्रज क्षेत्र में किसानों, स्थानीय उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा रहते हैं।
जयंत चौधरी की स्वाभिमान सभा में किसानों और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी चर्चा में रही। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों तक संदेश पहुंचाती है और स्थानीय मुद्दों को सामने रखती है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच पुराने गठबंधन की पृष्ठभूमि के कारण दोनों नेताओं के बयानों पर राजनीतिक नजर बनी हुई है। हालांकि, इस बयानबाजी का आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ेगा, यह आगे के राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।