मेरठ की रिया और लावण्या का कमाल: 3000 छात्राओं में चयन, अब सैटेलाइट निर्माण में निभा रहीं अहम भूमिका
मेरठ/ग्रेटर नोएडा: मेरठ की दो छात्राओं रिया और लावण्या ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कदम बढ़ाया है। दोनों छात्राएं ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में चल रहे ‘मिशन शक्तिसैट’ का हिस्सा हैं। देशभर की करीब 3,000 छात्राओं के बीच हुई चयन प्रक्रिया के बाद केवल 20 छात्राओं का चयन किया गया, जिसमें मेरठ की रिया और लावण्या भी शामिल हैं।
पिता की वर्दी से मिली रिया को प्रेरणा
मेरठ कैंट की रहने वाली रिया ने बताया कि वह अपने पिता को भारतीय सेना में ड्यूटी पर जाने से पहले कंधों पर सितारे लगाते देखती थीं। इन्हीं सितारों से प्रेरित होकर उनके मन में भी कुछ बड़ा करने का सपना पैदा हुआ।
अब रिया अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और मिशन शक्तिसैट के जरिए उन्हें सैटेलाइट निर्माण की तकनीक को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
3000 छात्राओं में से सिर्फ 20 का हुआ चयन
मिशन शक्तिसैट के लिए देशभर से करीब 3,000 छात्राओं ने चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। कठिन चयन प्रक्रिया के बाद कुल 20 छात्राओं को चुना गया, जिनमें मेरठ की रिया और लावण्या भी शामिल हैं।
कार्यक्रम में 108 देशों की छात्राएं हिस्सा ले रही हैं, जिससे दोनों छात्राओं के लिए यह अवसर और भी महत्वपूर्ण बन गया है।
रिया ने पूरे किए 21 मॉड्यूल
कक्षा 11 की छात्रा रिया को अपने स्कूल के माध्यम से मिशन के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने चयन प्रक्रिया के तहत 21 मॉड्यूल पूरे किए और इंटरव्यू दिया।
इंटरव्यू में छात्राओं से अंतरिक्ष में रुचि, भविष्य के लक्ष्य और मॉड्यूल में किए गए काम के अलावा तकनीकी और भौतिकी से जुड़े सवाल पूछे गए। उनकी नेतृत्व क्षमता और तकनीकी कौशल का भी आकलन किया गया।
लावण्या ने मुश्किल मॉड्यूल को मेहनत से किया आसान
लावण्या ने बताया कि मिशन के कुछ मॉड्यूल उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण थे, क्योंकि उनमें उच्च स्तर के विषय शामिल थे। उन्होंने वीडियो, गतिविधियों और क्विज के जरिए तैयारी की और धीरे-धीरे कठिन विषयों को समझने में सफलता हासिल की।
लावण्या का सपना आगे चलकर भारतीय वायुसेना में शामिल होना है, जबकि रिया अंतरिक्ष चिकित्सा यानी स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं।
सैटेलाइट बनाने में कर रहीं काम
मिशन शक्तिसैट के तहत दोनों छात्राओं को सैटेलाइट निर्माण से जुड़ी तकनीकी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिल रहा है।
इनमें प्रमुख रूप से:
- पेलोड डेवलपमेंट
- वैज्ञानिक इंटीग्रेशन
- डिजाइनिंग
- इंजीनियरिंग
- कोडिंग
जैसे कार्य शामिल हैं। इससे छात्राओं को सैटेलाइट निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया को समझने का अनुभव मिल रहा है।
मिशन शक्तिसैट का उद्देश्य क्या है?
स्पेस किड्ज इंडिया की संस्थापक डॉ. श्रीमथी केसन के मुताबिक, मिशन शक्तिसैट का उद्देश्य दुनिया की प्रतिभाशाली छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक से जोड़ना है।
कार्यक्रम में छात्राओं को उपग्रह निर्माण, पेलोड विकास, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिस्टम इंजीनियरिंग और STEM शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। छात्राएं सैटेलाइट की डिजाइन से लेकर उसके विकास, परीक्षण और अंतरिक्ष में तैनाती की प्रक्रिया को समझेंगी।
शक्तिसैट-LEO और शक्तिसैट-मून की योजना
मिशन के तहत छात्राओं द्वारा तैयार किए जाने वाले शक्तिसैट-LEO और शक्तिसैट-मून जैसे उपग्रहों की योजना है।
रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर लॉन्च करने की योजना है। यह पहल छात्राओं को अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी अनुभव देने के साथ-साथ देश और दुनिया की लड़कियों को STEM क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास है।
बेटियों को दिया खास संदेश
लावण्या ने अन्य बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें डरने के बजाय जिज्ञासु बनना चाहिए, सवाल पूछने चाहिए और समाज द्वारा तय सीमाओं से आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करना चाहिए।
वहीं रिया का कहना है कि असफलता के बाद रुकना नहीं चाहिए। दोबारा प्रयास करते हुए आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है।
मेरठ के लिए गर्व का मौका
रिया और लावण्या की उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि मेरठ के लिए भी गर्व की बात है। दोनों छात्राओं ने सीमित संख्या में चुने गए प्रतिभागियों में जगह बनाकर यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और जिज्ञासा के साथ छात्राएं अंतरिक्ष विज्ञान जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकती हैं।
📌 पूरी खबर एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| छात्राएं | रिया और लावण्या |
| शहर | मेरठ |
| कार्यक्रम | मिशन शक्तिसैट |
| स्थान | गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा |
| कुल चयन प्रक्रिया में छात्राएं | करीब 3,000 |
| चयनित छात्राएं | 20 |
| भाग लेने वाले देश | 108 |
| रिया की कक्षा | 11वीं |
| रिया का लक्ष्य | स्पेस मेडिसिन |
| लावण्या का लक्ष्य | भारतीय वायुसेना |
| मुख्य तकनीकी काम | पेलोड, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, कोडिंग |
| प्रस्तावित लॉन्च | अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस |
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