मुजफ्फरनगर में ED की कार्रवाई के बीच राणा परिवार की कहानी: स्टील कारोबार से सियासत तक का सफर, विवादों ने बदली राह
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद राणा परिवार एक बार फिर चर्चा में है। 24 अगस्त 2026 को ED ने शहर में राणा हाउस और शाह टाइम्स के कार्यालय समेत कई ठिकानों पर तलाशी ली। शुरुआती रिपोर्टों में कार्रवाई को मनी लॉन्ड्रिंग और जीएसटी से जुड़े मामले से जोड़कर देखा गया।
इसी कार्रवाई के बीच राणा परिवार की राजनीतिक और कारोबारी यात्रा भी चर्चा में आ गई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, यह परिवार कभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्टील कारोबार के लिए जाना जाता था, लेकिन समय के साथ परिवार के कई सदस्य राजनीति में भी सक्रिय हुए। बाद में राजनीतिक सफलताओं के साथ परिवार से जुड़े कई विवाद भी सुर्खियों में आते रहे।
ED की छापेमारी से फिर चर्चा में राणा परिवार
सोमवार सुबह ED की टीमें मेरठ रोड स्थित राणा हाउस पहुंचीं। इसके बाद शाह टाइम्स के कार्यालय सहित शहर के अन्य स्थानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। सभी स्थानों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
अमर उजाला की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि कार्रवाई के पीछे मनी लॉन्ड्रिंग और जीएसटी चोरी से जुड़े पहलुओं की जांच होने की संभावना है। बाद की रिपोर्ट में इस कार्रवाई को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मामले से जोड़ा गया, जिसमें पूर्व सांसद कादिर राना, पूर्व विधायक शाहनवाज राना और पूर्व विधायक नूर सलीम राना के नाम ED के रडार पर बताए गए।
ध्यान देने वाली बात: ED की तलाशी अपने आप में किसी व्यक्ति के अपराधी होने का प्रमाण नहीं है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किसी की जिम्मेदारी तय होती है।
खेती और स्क्रैप कारोबार से शुरू हुई कहानी
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सुजडू का राणा परिवार शुरुआत में खेती और स्क्रैप कारोबार से जुड़ा था। परिवार के कई सदस्यों ने धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार किया।
करीब 1985 में हाजी कमरुज्जमां राना ने स्टील फैक्टरी की दिशा में कदम बढ़ाया। इसके बाद परिवार का कारोबार तेजी से बढ़ा और राणा परिवार को क्षेत्र में ‘स्टील किंग’ के तौर पर पहचान मिलने लगी।
कारोबार के साथ परिवार का राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ता गया।
पालिका से संसद तक पहुंचा परिवार
राणा परिवार की राजनीति में बड़ी एंट्री पूर्व सांसद कादिर राना के जरिए हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कादिर राना वर्ष 1989 में पहली बार नगरपालिका सभासद चुने गए। इसके बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा।
बाद के वर्षों में वह अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े और 2009 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर मुजफ्फरनगर से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने।
परिवार के अन्य सदस्य भी राजनीति में सक्रिय हुए।
शाहनवाज राना और नूर सलीम की राजनीतिक पारी
पूर्व विधायक शाहनवाज राना भी राणा परिवार के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वह 2007 में मोरना सीट से विधायक चुने गए और बाद में बिजनौर से भी विधानसभा चुनाव जीता।
वहीं नूर सलीम राना ने भी चुनावी राजनीति में कदम रखा और 2012 में चरथावल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
इस तरह एक ही परिवार के कई सदस्यों ने पश्चिमी यूपी की राजनीति में अपनी जगह बनाई।
जिला पंचायत से लेकर विधानसभा तक प्रभाव
परिवार का राजनीतिक प्रभाव केवल विधानसभा और लोकसभा तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, इंतखाब राना, जो शाहनवाज राना की पत्नी हैं, जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहीं।
परिवार के अन्य सदस्यों ने भी स्थानीय राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई, हालांकि सभी को चुनावी सफलता नहीं मिली।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बदला राजनीतिक समीकरण
अमर उजाला की रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक सफलता के बीच राणा परिवार कई विवादों से भी घिरा रहा। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद परिवार की राजनीति को बड़ा झटका लगा और राजनीतिक प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ।
इसके बाद चुनावों में परिवार के उम्मीदवारों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
2017 में कादिर राना की पत्नी सईदा बेगम ने बसपा के टिकट पर बुढ़ाना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में कादिर राना सपा में सक्रिय हुए। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के विधानसभा और 2019 तथा 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्हें टिकट नहीं मिला।
कारोबार के साथ विवाद भी सुर्खियों में
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 में GST टीम ने वहलना चौक के पास राना स्टील पर छापा मारा था। उस कार्रवाई के दौरान विवाद की स्थिति पैदा होने और टीम के साथ कथित हाथापाई की बात सामने आई थी।
इसके अलावा परिवार से जुड़े कुछ अन्य मामलों का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। इनमें बिजली चोरी का मामला और कुछ आपराधिक आरोप शामिल हैं।
इनमें से कई मामलों में आरोप या मुकदमे रहे हैं और इन्हें दोष सिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
परिवार के अंदर भी सामने आया विवाद
राणा परिवार के भीतर संपत्ति और बंटवारे को लेकर विवाद भी सार्वजनिक रूप से सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार, जाकिर राना और कादिर राना के बीच बंटवारे का विवाद इतना बढ़ गया था कि जाकिर राना ने वहलना में सार्वजनिक धरना भी दिया था। बाद में मामला सुलझाने की कोशिश की गई।
अब कौन किस पार्टी में?
मौजूदा राजनीतिक स्थिति की बात करें तो अमर उजाला के अनुसार, कादिर राना सपा में सक्रिय हैं और मीरापुर तथा बुढ़ाना से दावेदारी की चर्चा है।
वहीं नूर सलीम राना RLD में सक्रिय बताए गए हैं और चरथावल सीट से टिकट की उम्मीद कर रहे हैं। पूर्व विधायक शाहनवाज राना को लेकर रिपोर्ट में बताया गया है कि वह मीरापुर उपचुनाव के दौरान आजाद समाज पार्टी से टिकट के दावेदार रहे थे।
इससे साफ है कि परिवार के राजनीतिक रास्ते भी एक जैसे नहीं रहे हैं।
ED की कार्रवाई के बाद क्या बदलेगा?
ED की ताजा कार्रवाई के बाद राणा परिवार की कारोबारी गतिविधियां और राजनीतिक प्रभाव एक बार फिर चर्चा में हैं। जांच एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन और ITC से जुड़े मामले में दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
आगे की कार्रवाई तलाशी में मिले दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
📌 पूरी खबर एक नजर में
| मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश |
| जांच एजेंसी | प्रवर्तन निदेशालय (ED) |
| मुख्य मामला | कथित फर्जी ITC/वित्तीय अनियमितता की जांच |
| प्रमुख ठिकाना | राणा हाउस |
| अन्य स्थान | शाह टाइम्स कार्यालय समेत कई ठिकाने |
| परिवार की कारोबारी पहचान | स्टील कारोबार |
| प्रमुख राजनीतिक नाम | कादिर राना, शाहनवाज राना, नूर सलीम राना |
| राजनीतिक क्षेत्र | पश्चिमी उत्तर प्रदेश |
| वर्तमान राजनीतिक स्थिति | परिवार के सदस्य अलग-अलग दलों में सक्रिय |
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