सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आस्था और परंपरा का प्रतीक श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज का ऐतिहासिक छड़ी मेला शुरू हो गया है। गंगोह रोड स्थित गोगा जी महाराज की म्हाड़ी पर पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। नीले झंडों, निशानों और 26 छड़ियों के साथ श्रद्धालुओं ने म्हाड़ी पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और अपनी मनोकामनाओं के लिए मन्नतें मांगीं।
करीब 800 वर्षों से चली आ रही मेले की परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। तीन दिवसीय इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के अलावा आसपास के कई राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
26 छड़ियों के साथ पहुंचते हैं श्रद्धालु
मेले की प्रमुख विशेषता 26 छड़ियां और नेजा हैं। शुक्ल पक्ष की दशमी के अवसर पर इन छड़ियों को शोभायात्रा के साथ म्हाड़ी तक लाया जाता है। ढोल-नगाड़ों और धार्मिक जयकारों के बीच निकली शोभायात्रा के बाद छड़ियां म्हाड़ी स्थल पर पहुंचती हैं।
स्थानीय आयोजन समिति के अनुसार, सभी छड़ियों का विशेष रूप से शृंगार किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अपने-अपने निशान लेकर म्हाड़ी पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु
गोगा जी महाराज की म्हाड़ी पर सहारनपुर के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी है। कई परिवार और संगत के साथ लोग यहां पहुंचकर बाबा के दर्शन कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे लंबे समय से इस धार्मिक आयोजन में शामिल होते आ रहे हैं। कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि वे बचपन से ही म्हाड़ी पर आते रहे हैं और यहां की परंपरा से उनका भावनात्मक जुड़ाव है।
मनोकामना पूरी होने की मान्यता
गोगा जी महाराज की म्हाड़ी को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। इसी विश्वास के चलते बड़ी संख्या में लोग नीले झंडे और निशान लेकर म्हाड़ी पर पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। यह धार्मिक मान्यता है, जिसकी कोई वैज्ञानिक पुष्टि आवश्यक रूप से नहीं मानी जानी चाहिए।
मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल नजर आ रहा है। जयकारों, ढोल-नगाड़ों और श्रद्धालुओं की भीड़ से गंगोह रोड और म्हाड़ी परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।
प्रशासन ने किए सुरक्षा के इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। मेले के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन की ओर से भीड़ और यातायात व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।
मेले के कारण यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, नकुड़-सहारनपुर मार्ग पर 21 से 23 सितंबर तक रूट डायवर्जन लागू किया गया है, ताकि मेले में आने वाली भीड़ के बीच यातायात को व्यवस्थित रखा जा सके।
तीन दिन तक चलेगा आयोजन
यह धार्मिक आयोजन तीन दिनों तक चलने वाला है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, 21 और 22 सितंबर को श्रद्धालु छड़ियों के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे, जबकि 23 सितंबर को छड़ियों की वापसी होगी। आयोजन समिति ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई है।
800 साल पुरानी परंपरा का दावा
गोगा म्हाड़ी मेले की ऐतिहासिक परंपरा को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग अवधि का उल्लेख मिलता है। Aaj Tak की मौजूदा रिपोर्ट में इसे करीब 800 वर्ष पुरानी परंपरा बताया गया है, जबकि सितंबर 2026 की एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट में आयोजन की परंपरा को इससे भी पुराना बताया गया है।
फिलहाल, सहारनपुर में शुरू हुआ यह मेला धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का बड़ा आयोजन बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जाहरवीर गोगा महाराज की म्हाड़ी पर पहुंच रहे हैं।